Monday, March 22, 2010
प्यारी सी गोरय्या
आज २० मार्च को गोरय्या दिवस मनाते हुए देख कर ना जाने क्यों मन व्यथित हो उठा. अपनी जीवन शैली से आज हम वहां पर खड़े हैं कि एक एक दिन को हमे किसी विशेष उद्देश्य के लिए रखना पड़ता है...घरों का निर्माण करते समय अगर हम गोरय्या जैसी सामान्य चिड़िया के लिए पहले से ही रोशनदान, आले इत्यादि छोड़ दें तो वो भी हमारे घर का एक सदस्य हो जाएगी और जब चिह्चिहाते हुए वह हमारे आँगन में चावल बीनने आएगी तो हमारे घर के बच्चों को निर्जीव खिलौनों से वित्रष्णा हो जाएगी..सच में मैं आज भी उस चह्चह्कने को याद करता हूँ तो ऐसा लगता हैं मानो गोरय्या यहीं मेरे आस पास ही कही हैं...काश हम सब इस चिड़िया के लिए भी घर का एक कोना खाली छोड़ पाते....
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बहुत बढ़िया मन की बात ..काश सभी ऐसा सोचते ..कर पाते तो कितना अच्छा होगा .. मुझे पशु पक्षियों से बहुत अच्छे लगते हैं .. उनसे बातें करना मन को सुकून पहुचता हैं ..
ReplyDeleteब्लॉग पर लिखते रहिये ..मन को सुकून मिलता है ..
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